ईरान हमले से बढ़ा तनाव, वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराया संकट
शनिवार को अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने पश्चिम-एशिया के कई तेल निर्यातक देशों पर मिसाइल दागे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव गंभीर रूप से बढ़ा है। हमले के बाद तेल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान से ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें $70-$73 या उससे ऊपर पहुंच चुकी हैं, और अगर संघर्ष जारी रहा तो $80 या $110 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बाधित हुई तो संकट और गंभीर हो सकता है। होर्मुज से दुनिया के लगभग 20% तेल की खेप गुजरती है और अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ी परेशानी आ सकती है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों की लगभग आधी मासिक तेल खपत इसी मार्ग से आती है। तेल की कीमतें बढ़ने से सभी देशों के लिए ऊर्जा महंगी हो सकती है जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाधित है, क्योंकि रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों से उसके निर्यात को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और तेल बाजार अस्थिर है; वहीं अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तेल टैंकर और कच्चे तेल पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई की है, जिससे आपूर्ति चैनलों में और अनिश्चितता पैदा हो रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेल कंपनियों को 467 अरब डॉलर का मुनाफा
रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बीपी, शेवरॉन, एक्सॉनमोबिल, शेल और टोटलएनर्जीज़ ने मिलकर अब तक 467 अरब डॉलर का लाभ अर्जित किया है। यह विश्लेषण 24 फरवरी को युद्ध के चार साल पूरे होने पर जारी किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि इन कंपनियों का संयुक्त मुनाफा 2021 में 87 अरब डॉलर था, जो 2022 में बढ़कर 195 अरब डॉलर हो गया। रिपोर्ट का कहना है कि कई प्रमुख तेल और गैस कंपनियों ने इस अतिरिक्त कमाई का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा में निवेश बढ़ाने के बजाय जीवाश्म ईंधन के उत्पादन को और बढ़ाने तथा शेयरधारकों को अधिक लाभ देने में किया।