अमेरिका ने शुरू की वेनेज़ुएला के तेल की बिक्री
वेनेजुएला पर आक्रमण कर पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के 11 दिन बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल की पहली बिक्री की है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहा था कि वेनेजुएला के तेल भंडार अब अमेरिका के नियंत्रण में हैं और वह अमेरिकी कंपनियों को वहां निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे।
गुरुवार को न्यूयॉर्क-स्थित समाचार वेबसाइट सेमाफोर ने खबर दी कि अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल की पहली बिक्री पूरी कर ली है जिसकी कीमत करीब 50 करोड़ डॉलर बताई गई है। यह बिक्री काराकास और वाशिंगटन, डीसी के बीच हुए 2 अरब डॉलर के सौदे का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए यह भी तय किया है कि तेल बिक्री से होने वाली आय अमेरिकी ट्रेजरी के नियंत्रित खातों में रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह राशि फिलहाल कतर स्थित एक खाते में जमा है।
अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के तेल के दोहन से ख़त्म हो सकता है 13% कार्बन बजट
वेनेजुएला के तेल को लेकर अमेरिका की योजनाएं जलवायु लक्ष्यों के लिए गंभीर चिंता पैदा कर सकती हैं। द गार्जियन में छपे एक विश्लेषण के अनुसार, अगर अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं, तो 2050 तक वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने के लिए बचा हुआ करीब 13 प्रतिशत कार्बन बजट खत्म हो सकता है।
इस बीच, फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी तेल कंपनियां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निवेश से पहले मजबूत कानूनी और वित्तीय गारंटी की मांग कर रही हैं। हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि वेनेजुएला में निवेश करने वाली अमेरिकी कंपनियों को मुआवजा दिया जाएगा। फिलहाल शेवरॉन ही इकलौती अमेरिकी कंपनी है, जिसके पास वेनेजुएला का कच्चा तेल निर्यात करने का लाइसेंस है।
52 साल में पहली बार चीन और भारत में कोयला बिजली में गिरावट
कोयला आधारित बिजली उत्पादन के मामले में भारत और चीन में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा गया है। कार्बन ब्रीफ के विश्लेषण के अनुसार, 1973 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब दोनों देशों में एक ही साल में कोयले से बिजली उत्पादन घटा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों ने रिकॉर्ड स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जोड़ी। इसी दौरान भारत में कोयला बिजली उत्पादन में 3 प्रतिशत और चीन में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
द गार्जियन ने इसे वैश्विक उत्सर्जन में कमी की दिशा में अहम मोड़ बताया है। हालांकि ब्लूमबर्ग ने कहा कि यह गिरावट स्थायी होगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत में अपेक्षाकृत हल्की गर्मी और बिजली मांग में धीमी बढ़ोतरी भी इसकी वजह रही।