2025 में भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़ी गिरावट

Editorial Team17 मार्च. 2026
2025 में भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़ी गिरावट

2025 में भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बड़ी कमी दर्ज की गई। यह जानकारी क्लाइमेट ट्रेस के नए आंकड़ों में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से बिजली क्षेत्र में प्रदूषण कम होने और नवीकरणीय ऊर्जा — जैसे सौर और पवन ऊर्जा — के बढ़ते उपयोग से हुई। दुनिया के 10 बड़े उत्सर्जन क्षेत्रों में 2025 में सबसे अधिक वृद्धि जीवाश्म ईंधन से जुड़े कार्यों में हुई। परिवहन, निर्माण और इमारतों से भी उत्सर्जन बढ़ा। हालांकि बिजली क्षेत्र, जो वैश्विक प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है, उसमें थोड़ी कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कई क्षेत्रों में उत्सर्जन घटने लगा है।

भारत में वायु प्रदूषण अब साल भर का संकट, कई शहरों में बढ़ रहा स्वास्थ्य पर खतरा

भारत में वायु प्रदूषण को लंबे समय से सर्दियों की समस्या माना जाता रहा है, खासकर दिल्ली में दिखने वाले स्मॉग के कारण।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अब पूरे साल कई शहरों में बना रहता है। लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क से हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारी और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। अदृश्य प्रदूषक भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।

सरकार ने 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत 130 से अधिक शहरों में निगरानी बढ़ाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण केवल शहरों तक सीमित नहीं है और इसके समाधान के लिए क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित कदम जरूरी हैं। 

ईरान के तेल भंडार पर बमबारी से लंबे समय तक पर्यावरणीय नुकसान की आशंका

ईरान के तेल भंडारण और ईंधन ढांचे पर हुए हवाई हमलों से लंबे समय तक पर्यावरणीय नुकसान होने की आशंका जताई गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार इन हमलों से हवा, पानी और खाद्य श्रृंखला प्रदूषित हो सकती है। तेहरान के उत्तर-पूर्व में स्थित शाहरान तेल डिपो और शाहर-ए ईंधन भंडार पर हमले के दो दिन बाद भी आग जल रही है। ईरान की पर्यावरण एजेंसी ने जहरीले रसायनों के खतरे को देखते हुए लोगों को घरों में रहने की सलाह दी। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल प्रतिष्ठानों के जलने से निकलने वाले रसायन अम्लीय वर्षा (एसिड रेन) का कारण बन सकते हैं और बच्चों, बुजुर्गों तथा बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।

बोकारो स्टील प्लांट से सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन दर्ज नहीं: रिपोर्ट

एक नई रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो रहा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट में कहा गया कि नियमों में खामी के कारण प्लांट की सिंटरिंग यूनिट से निकलने वाला यह प्रदूषण निगरानी से बाहर रह जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इसके कारण हर साल लगभग 273 कम वजन वाले बच्चों का जन्म और 284 समय से पहले जन्म के मामले हो सकते हैं। सल्फर डाइऑक्साइड एक हानिकारक गैस है जो सांस और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों ने बेहतर वायु निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण तकनीक में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई है।

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