भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत ‘संतुलित तरीके’ से कृषि आयात खोलने का फैसला, किसान संगठनों में चिंता

Editorial Team16 फ़र॰. 2026
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत ‘संतुलित तरीके’ से कृषि आयात खोलने का फैसला, किसान संगठनों में चिंता

भारत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कृषि आयात को ‘संतुलित (कैलिब्रेटेड) तरीके’ से खोलने का निर्णय लिया है। हालांकि किसान संगठनों ने मक्का, ज्वार, सोयाबीन और पशु चारे में इस्तेमाल होने वाली अन्य फसलों की कीमतों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, किसान समूहों का कहना है कि सोयाबीन तेल के आयात पर शुल्क में कमी से घरेलू सोयाबीन कीमतें और गिर सकती हैं। पिछले वर्ष से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान के सोयाबीन किसान लंबे मूल्य संकट का सामना कर रहे हैं।

एएसएचए-किसान स्वराज के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में सोयाबीन का अखिल भारतीय औसत बाजार भाव 3,942 रुपए रहा, जो 5,328 रुपए के एमएसपी से लगभग 26% कम है। वहीं मक्का की कीमतें भी एमएसपी से करीब 24% नीचे रहीं। संगठन ने चेतावनी दी कि यह समझौता किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

जैव-विविधता बहाली पर कदम नहीं उठाए तो बड़े नुकसान में होंगी कंपनियां: रिपोर्ट

इंटरगवर्मेंटल साइंस-पॉलिसी प्लेटफॉर्म ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेज (आईपीबीईएस) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली दो शताब्दियों में वैश्विक अर्थव्यवस्था सौ गुना से अधिक बढ़ी है, जिसकी कीमत जैव-विविधता को भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रकृति का यह नुकसान अब अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

रिपोर्ट तीन वर्षों में 35 देशों के 79 विशेषज्ञों ने तैयार की। इसमें कहा गया है कि जैव-विविधता को बचाने में कंपनियों की अहम भूमिका है, लेकिन उन्हें पर्याप्त जानकारी, प्रोत्साहन और सहयोग नहीं मिलता। 2023 में लगभग 7.3 ट्रिलियन डॉलर ऐसे कामों में खर्च हुए जिनसे प्रकृति को नुकसान हुआ, जबकि संरक्षण पर सिर्फ 220 अरब डॉलर खर्च हुए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों को अभी से ठोस लक्ष्य तय कर प्रकृति संरक्षण को अपनी रणनीति में शामिल करना चाहिए।

मेघालय में अवैध रैट-होल खदान विस्फोट में 27 मजदूरों की मौत

मेघालय के ईस्ट जयन्तिया हिल्स जिले के माइनसिंगत गांव में अवैध रैट-होल कोयला खदान में हुए विस्फोट में 27 मजदूरों की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। विस्फोट पांच फरवरी को हुआ, जिसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने कई दिनों तक बचाव अभियान चलाकर शव निकाले। मृतकों में असम और नेपाल के श्रमिक शामिल हैं। मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रैट-होल खनन पर 2014 में नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने प्रतिबंध लगाया था, फिर भी अवैध खनन जारी है। इससे पहले भी क्षेत्र में ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिन पर अदालतें सख्त टिप्पणी कर चुकी हैं।

रैट-होल खनन दुनिया की सबसे खतरनाक खनन पद्धतियों में गिनी जाती है। इसमें मजदूर बेहद संकरी, हाथ से खोदी गई सुरंगों में बिना पर्याप्त वेंटिलेशन, सुरक्षा उपकरण या गैस जांच के उतरते हैं। सुरंगें अक्सर पानी से भरी पुरानी खदानों या मीथेन गैस पॉकेट्स से जुड़ी होती हैं, जहां जरा सी चिंगारी भी विस्फोट का कारण बन सकती है। ढांचागत सहारे के अभाव में धंसान और बाढ़ का खतरा लगातार बना रहता है। इसके अलावा, अम्लीय खदान जल निकासी से नदियां प्रदूषित होती हैं, जमीन बंजर होती है और आसपास के समुदायों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ते हैं।

नेट ज़ीरो लक्ष्य के लिए बड़े ऊर्जा सुधार जरूरी: नीति आयोग

नीति आयोग की नई रिपोर्ट ‘सिनारियोज़ टुवर्ड्स विकसित भारत एंड नेट जीरो’ के अनुसार भारत 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल कर सकता है। रिपोर्ट में दो परिदृश्य बताए गए हैं — वर्तमान नीति और नेट ज़ीरो। नेट ज़ीरो मार्ग में बिजली अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी और 2070 तक नवीकरणीय व परमाणु ऊर्जा का वर्चस्व होगा। इसके लिए 2070 तक लगभग 22.7 ट्रिलियन डॉलर निवेश की जरूरत होगी। भूमि, पानी, खनिज और वित्त बड़ी चुनौतियां हैं। रिपोर्ट ने ऊर्जा दक्षता, ग्रीन फाइनेंस, संस्थागत सुधार और मिशन मोड में काम करने पर जोर दिया है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकें।

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