दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की रफ्तार धीमी, योजनाएं बदल रहे निर्माता

Editorial Team31 मार्च. 2026
दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की रफ्तार धीमी, योजनाएं बदल रहे निर्माता

दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की ओर बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। कई बड़ी वाहन कंपनियों ने अपनी पुरानी योजनाओं में बदलाव किया है। होंडा, मर्सिडीज-बेंज, फोर्ड, स्टेलांटिस और वोल्वो ने अपने लक्ष्य पीछे खिसकाए हैं। अब पेट्रोल और हाइब्रिड कारों की मांग उम्मीद से ज्यादा बनी हुई है। लग्जरी ब्रांड भी इस बदलाव से प्रभावित हैं। रोल्स-रॉयस और बेंटले जैसी कंपनियां पेट्रोल मॉडल जारी रखेंगी। कई कंपनियां अब हाइब्रिड विकल्प पर ज्यादा जोर दे रही हैं।

इस बदलाव की एक वजह ग्राहकों की पसंद है। कई लोग अभी भी पारंपरिक इंजन को पसंद करते हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप में सरकारी समर्थन भी कुछ कम हुआ है। इससे इलेक्ट्रिक कारों की राह मुश्किल हुई है। कंपनियों को अपनी योजनाएं बदलने में भारी लागत भी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद, इलेक्ट्रिक कारों की दिशा में बदलाव जारी रहेगा, लेकिन रफ्तार धीमी रहेगी। 

वैश्विक ईवी बैटरी बाजार में चीनी निर्माताओं की हिस्सेदारी हुई 70%

चीन की कंपनियों ने वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार बाजार में उनकी हिस्सेदारी अब 70 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सीएटीएल और बीवाईडी जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में आगे हैं। सीएटीएल दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी निर्माता बनी हुई है।

बीवाईडी ने भी तेजी से विस्तार किया है। उसने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है और अन्य कंपनियों को भी बैटरी दे रही है। इस बढ़त की वजह बड़े पैमाने पर उत्पादन और कम लागत है।

नई बैटरी तकनीक से इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज बढ़ने की उम्मीद

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ सरे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने नई बैटरी डिजाइन विकसित की है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों और मोबाइल जैसे उपकरणों की बैटरी लाइफ बढ़ सकती है। लिथियम-आयन बैटरी स्मार्टफोन, ईवी समेत कई उपकरणों में इस्तेमाल होती है। 

सामान्य बैटरियों में ग्रेफाइट होता है, जो सीमित ऊर्जा ही स्टोर कर पाता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने इस नई लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट की जगह सिलिकॉन और कार्बन नैनोट्यूब का नया ढांचा बनाया है। यह ढांचा चार्जिंग के दौरान फैलने के बावजूद टूटता नहीं है।

परीक्षण में इस बैटरी ने बहुत अधिक ऊर्जा स्टोर की और कई बार चार्ज होने के बाद भी स्थिर रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ज्यादा चलने वाली बैटरियां बनाने में मदद करेगी।

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