वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन

Editorial Team31 दिस॰. 2025
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन

दिल्ली सरकार ने राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य गंभीर वायु गुणवत्ता संकट का वैज्ञानिक और प्रभावी समाधान निकालना है। यह समिति सरकार की पांच-स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का मुख्य हिस्सा है, जिसमें नवाचार, धूल और ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कार्रवाई, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी और लंबे समय तक सफाई व हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं।

सरकार ने तेज़ निर्णय कार्यान्वयन के लिए इम्प्लीमेंटेशन कमेटी भी बनाई है, ताकि विशेषज्ञ सुझावों को जल्दी तथ्य-प्रधान कार्रवाई में बदला जा सके। इन बैठकों का लक्ष्य न केवल प्रदूषण से तात्कालिक लड़ाई है, बल्कि हवा की गुणवत्ता को स्थायी रूप से बेहतर बनाना भी है।प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुआ है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं और सरकारी कदमों की ज़रूरत और स्पष्ट हो गई है।

दिल्ली की जहरीली हवा अब मानसिक स्वास्थ्य पर हमला: विशेषज्ञों की चेतावनी

दिल्ली की लगातार बिगड़ती हवा अब केवल फेफड़ों ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहने से बच्चों में IQ स्तर कम होना, याददाश्त कमजोर पड़ना और एडीएचडी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

एमोनीड्स की मनोचिकित्सक डॉ. अंचल मिगलानी ने कहा कि हवा में मौजूद जहरीले तत्व अवसाद, चिंता, नींद की समस्या और संज्ञानात्मक विकास में रुकावट पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले उन शहरों से 30-40% अधिक हैं, जहां एक्यूआई स्तर बेहतर है

मनोवैज्ञानिक फिज़ा खान ने कहा कि ‘प्रदूषण केवल फेफड़ों का नहीं, दिमाग का भी मसला है।’ धुंधले आसमान और कम दृश्यता के दिनों में लोग चिड़चिड़ापन, थकान और उदासी महसूस करते हैं। लगातार ‘खराब हवा’ के माहौल से क्रॉनिक स्ट्रेस और सामाजिक अलगाव बढ़ता है

एम्स की डॉ. दीपिका दहीमा ने इसे “मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल” बताया और कहा कि स्वच्छ हवा अब भावनात्मक और संज्ञानात्मक सुरक्षा का सवाल बन चुकी है। विशेषज्ञों ने सरकार से मानसिक स्वास्थ्य को पर्यावरण नीति का हिस्सा बनाने की अपील की है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर 40% प्रदूषण की बात मानी नितिन गडकरी ने, कहा राजधानी की हवा से दो दिन में हो जाता है संक्रमण 

दिल्ली की जहरीली हवा पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि राजधानी की वायु प्रदूषण समस्या में परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है।

नई दिल्ली में My Idea of Nation First – Redefining Unalloyed Nationalism पुस्तक के विमोचन समारोह में गडकरी ने कहा कि दिल्ली में मात्र दो दिन रुकने के बाद ही उन्हें संक्रमण हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया, “मैं दिल्ली में सिर्फ दो दिन रुकता हूं और बीमार पड़ जाता हूं, आखिर राजधानी इतनी प्रदूषित क्यों है?”

गडकरी ने कहा, “मैं परिवहन मंत्री हूं, और 40% प्रदूषण हमारे कारण होता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश हर साल 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधनों के आयात पर खर्च कर रहा है, जो न केवल आर्थिक नुकसान है बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहा है। उन्होंने कहा, “सच्चा राष्ट्रवाद आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने में है। जब हम इतना पैसा खर्च कर अपने ही देश की हवा खराब कर रहे हैं, तो यह कैसी देशभक्ति है?”

इस बीच दिल्ली के कई हिस्सों में घना धुंध और स्मॉग छाया हुआ है। आईटीओ क्षेत्र में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 374 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप स्टेज-IV के सभी उपाय लागू कर दिए हैं। विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि विपक्षी दलों के हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो पाई।

इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप: 7 की मौत, जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी से बीमारी फैलने का मामला सामने आया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में डायरिया से अबतक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 149 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। प्रशासन ने पूरे इलाके से पीने के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं और रिपोर्ट 48 घंटे में आने की उम्मीद है। इस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिला प्रशासन को सभी मरीजों के लिए बेहतर इलाज सुनिश्चित करने और जलस्रोतों की आपात समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि सभी मरीजों को उल्टी और दस्त की शिकायत थी। उन्होंने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि मरीजों को 27 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 

वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि दूषित पानी पीने से बीते एक हफ्ते में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है, जिनमें छह महिलाएं शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भागीरथपुरा में तैनात एक जोनल अधिकारी और एक सहायक अभियंता को तत्काल निलंबित कर दिया है, जबकि प्रभारी सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव पाया गया, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ था, जिससे पीने का पानी दूषित होने की आशंका है।

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