तेल की बढ़ती कीमतों से भारत में ईवी एडॉप्शन में आई तेजी

Editorial Team1 मई. 2026
तेल की बढ़ती कीमतों से भारत में ईवी एडॉप्शन में आई तेजी

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग बढ़ रही है। महंगे पेट्रोल-डीजल के कारण पारंपरिक इंजन (आईसीई) और ईवी के खर्च के बीच का अंतर कम हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर दोपहिया और तिपहिया वाहनों में दिख रहा है, जहां ईवी का खर्च काफी कम है।

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए सरकार भी ईवी को बढ़ावा दे रही है ताकि बाहरी संकट का असर कम हो विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल महंगा बना रहा, तो ईवी का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं से भी तेजी से बढ़ सकता है।

सोडियम बैटरियां बनी नया विकल्प

लिथियम बैटरी के मुकाबले अब सोडियम बैटरियां तेजी से उभर रही हैं, जो सस्ती और अधिक सुरक्षित मानी जा रही हैं। चीन की कंपनी सीएटीेल ने सोडियम-आयन बैटरियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की योजना बनाई है, जिसकी बिक्री 2026 से शुरू होगी।

सोडियम बैटरियों में ऊर्जा घनत्व (एक ही जगह में स्टोर होने वाली ऊर्जा) लिथियम से करीब 30% कम होता है, लेकिन ये ज्यादा सस्ती और आग लगने के जोखिम में कम होती हैं। ठंडे मौसम में भी ये अच्छी तरह काम करती हैं, जहां लिथियम बैटरियां कमजोर पड़ जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये बैटरियां सस्ती कारों, डिलीवरी वाहनों और बिजली भंडारण के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं।

ईवी ट्रांज़िशन के बीच जापानी कंपनियों का हाइब्रिड तकनीक पर जोर

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ट्रांज़िशन के बीच जापानी कंपनियां हाइब्रिड तकनीक पर जोर दे रही हैं। चार्जिंग स्टेशनों की कमी और बिजली आपूर्ति की दिक्कतों के कारण भारत में पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना अभी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में हाइब्रिड वाहन बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसी कंपनियों की हाइब्रिड गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ी है। ग्रैंड विटारा और हाई-राइडर जैसे मॉडल कई मामलों में इलेक्ट्रिक कारों से ज्यादा बिक रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइब्रिड तकनीक भारत में ईवी बदलाव का अहम पुल साबित हो सकती है।

Share

LinkedInXFacebook

लेखक के बारे में

Editorial Team

Editorial Team

A team of handpicked and dedicated writers committed to fact check each climate-related statement. They go to the roots and intent of each policy implemented, internationally and at home, to help you understand climate better.
लेखक के और लेख देखें