ईरान युद्ध: 14 दिनों में ही 84 देशों से अधिक उत्सर्जन

Editorial Team31 मार्च. 2026
ईरान युद्ध: 14 दिनों में ही 84 देशों से अधिक उत्सर्जन

अमेरिका और इज़राइल के ईरान के साथ चल रहे युद्ध का असर अब जलवायु पर भी साफ दिख रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के पहले 14 दिनों में ही करीब 50 लाख टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हुआ है, जो 84 देशों के कुल उत्सर्जन से ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20,000 इमारतों के नुकसान से ही करीब 24 लाख टन CO₂ उत्सर्जन हुआ। इसके अलावा लड़ाकू विमानों और सैन्य जहाजों द्वारा 15 से 27 करोड़ लीटर ईंधन जलाया गया, जिससे करीब 5.29 लाख टन उत्सर्जन हुआ।

तेहरान में ईंधन भंडारों पर हमलों के बाद 25 से 59 लाख बैरल तेल जल गया, जिससे करीब 18.8 लाख टन CO₂ उत्सर्जन हुआ। वहीं मिसाइल, ड्रोन और सैन्य उपकरणों के इस्तेमाल से भी हजारों टन अतिरिक्त प्रदूषण फैला।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध जारी रहा तो तेल ढांचे पर हमले बढ़ेंगे और इससे उत्सर्जन तेजी से बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक जलवायु संकट और गंभीर हो जाएगा।

प्रदूषण से जुड़े अर्थदंड से बनाया जाएगा नया पर्यावरण संरक्षण कोष: सरकार

केंद्र सरकार ने प्रदूषण से जुड़े जुर्मानों के उपयोग पर नई जानकारी दी है। पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि वायु, जल और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत वसूले गए सभी जुर्मानों की राशि अब पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा होंगे। यह कोष वर्ष 2026 में बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करना है। इसके साथ ही प्रदूषित स्थलों की सफाई और सुधार के काम भी इससे किए जाएंगे।

पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन में यह जानकारी देते हुए कहा कि कोष की राशि का एक छोटा हिस्सा प्रशासनिक कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। यह खर्च कुल राशि के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। इसमें कर्मचारियों का वेतन और जरूरी दफ्तर खर्च शामिल हैं।

विपक्ष ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने हितों के टकराव की आशंका जताई। यह भी पूछा गया कि क्या जुर्माने की राशि का उपयोग सीधे प्रभावित स्थलों पर होगा। सरकार ने जवाब में कहा कि कोष के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं और उनका पालन किया जाएगा।

पाकिस्तान सबसे प्रदूषित देश, भारत छठे स्थान पर

एक नई रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश है, जबकि बांग्लादेश दूसरे और ताजिकिस्तान तीसरे स्थान पर हैं। भारत इस सूची में छठे स्थान पर है। यह जानकारी IQAir की 2025 की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 143 में से 130 देशों में वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से अधिक पाया गया। दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं।

शहरों में लोनी सबसे प्रदूषित है, जबकि दिल्ली चौथे स्थान पर है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्रदूषण का लोगों के स्वास्थ्य पर, विशेषकर बच्चों पर, दीर्घकालिक असर पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े कचरे से पारे के रिसाव के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। मामला खतरनाक कचरे के निपटान और जलाए गए अवशेष से जुड़ा है। यह कचरा भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड साइट से आया था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इस मामले की लंबे समय से निगरानी कर रहा है। अदालत ने जमीन और भूजल को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अवशेष राख को धार जिले के पीथमपुर स्थित केंद्र में रखा गया है। याचिकाकर्ता ने पारे के रिसाव का खतरा बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ठोस सबूत के साथ हाई कोर्ट में जाएं।

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