भारत को 2030 तक ई-ट्रकों के लिए 9 गीगावाट चार्जिंग क्षमता की आवश्यकता होगी: रिपोर्ट

Manjari Sharma31 अग॰. 2025
फोटो: A Krebs/Pixabay.com

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इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) के एक अध्ययन के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रक) की अनुमानित ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत को लगभग 9 गीगावाट (GW) चार्जिंग क्षमता की आवश्यकता होगी। अनुमानित चार्जिंग क्षमता दिल्ली की वर्तमान बिजली उत्पादन क्षमता के पाँच गुना के बराबर है।

केयरएज की जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के शुरुआती महीनों तक सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 26,367 थी और देश में वर्तमान में सड़क पर प्रत्येक 235 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लगभग एक चार्जर है।

नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के अति फैलाव से भारत में फ़िर बढ़ रहा बिजली की अधिकता का खतरा

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के प्रमुख घनश्याम प्रसाद ने चेतावनी दी है कि भारत का नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार मांग से आगे निकल रहा है। दिल्ली में ब्लूमबर्गएनईएफ शिखर सम्मेलन में उन्होंने डेवलपर्स को पिछले दशक की तापीय अतिक्षमता की गलतियों को दोहराने के प्रति आगाह किया, जिसके कारण जनरेटर दिवालिया हो गए थे।

कुल 44 गीगावाट की नवीकरणीय परियोजनाओं में आपूर्ति समझौतों का अभाव और कटौती पहले से ही आम बात है, इसलिए प्रसाद ने क्षमता वृद्धि, मांग और ट्रांसमिशन के बीच गहन समन्वय का आग्रह किया। उन्होंने गुजरात के खावड़ा का उदाहरण दिया, जहाँ 4,000 मेगावाट के सबस्टेशन में केवल 300-500 मेगावाट ही जुड़ा है। उद्योग जगत के नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उत्पादन तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन ट्रांसमिशन और वितरण में निवेश अभी भी बहुत पीछे है—जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी बाधा है।

ट्रम्प ने पवन ऊर्जा पर निशाना साधते हुए टर्बाइन आयात की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू की

ट्रम्प प्रशासन ने पवन टर्बाइनों और उनके कलपुर्जों के आयात की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू की है, जिससे इस क्षेत्र पर टैरिफ बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। संघीय रजिस्टर में घोषित, धारा 232 की जांच यह आकलन करेगी कि क्या विदेशी सप्लाई चेन, सब्सिडी या व्यापारिक प्रथाएं अमेरिकी सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करती हैं, जिसमें आयातित कलपुर्जों का संभावित “हथियारीकरण” भी शामिल है। यह कदम इस महीने की शुरुआत में स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ में की गई नई बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है, जिसका असर पवन ऊर्जा उपकरणों पर भी पड़ा है। उद्योग जगत के जानकार कहते हैं कि इस जांच से ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी व्यापार नीति को नया रूप दे रही है जो पवन ऊर्जा के विकास को रोकने के बढ़ते प्रयासों की दिशा में एक और मोर्चा है।

वर्ष 2025 की शुरुआत में चीन का कार्बन उत्सर्जन 1% घटा: अध्ययन

कार्बन ब्रीफ के लिए ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (क्रिया) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में चीन का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पिछले वर्ष की तुलना में 1% कम हुआ है, जिसका मुख्य कारण नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि है। कोयले के उपयोग में कमी के कारण बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन में 3% की गिरावट आई, हालांकि गैस की खपत में 6% की वृद्धि हुई। चीन के प्रापर्टी मार्केट में संकट के कारण धातु, सीमेंट और इस्पात क्षेत्र में भी उत्सर्जन में कमी आई। हालांकि, रसायन क्षेत्र से उत्सर्जन में वृद्धि जारी रही, कोयले से रसायनों का उत्पादन 20% बढ़ा। इस प्रवृत्ति ने 2020 से चीन के उत्सर्जन में पहले ही 3% की वृद्धि कर दी है, और आगे भी वृद्धि की संभावना है।

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