Hridayesh Joshi
CarbonCopy contributor.
मौसमी अनिश्चितता के बीच एक विश्वसनीय पूर्व चेतावनी प्रणाली बनाने की जंग
कार्बनकॉपी की द्विभागीय श्रृंखला के पहले हिस्से में हृदयेश जोशी बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ते चरम मौसमी हालात से निपटने में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) किन चुनौतियों का सामना कर रहा है, शुरुआती चेतावनियों में क्या खामियां हैं और तीव्र होती आपदाओं के खिलाफ मजबूत रक्षा तंत्र बनाने के लिए देश को क्या करना होगा।
किसान आत्महत्याओं से घिरे मराठवाड़ा में जलवायु संकट की मार
सितंबर के पहले हफ्ते में हुई अप्रत्याशित बारिश ने मराठवाड़ा के कम से कम 12 लाख हेक्टयर में फसल तबाह हो गई। अन्य कारणों के साथ जलवायु परिवर्तन किसानों को कर्ज़ के गर्त में धकेल रहा है और वो आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं।
क्या चीड़ है उत्तराखंड के जंगलों में आग का असली ‘खलनायक’?
उत्तराखंड में अनियंत्रित जंगलों की आग के लिए अक्सर चीड़ को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन फायर लाइनों का अभाव, वन कर्मचारियों और आग से लड़ने के लिए संसाधनों की कमी, और क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ता तापमान और शुष्क मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए यह स्वीकार करना जरूरी है।
भारत की कोयला गैसीकरण योजना: संभावनाएं, रोडमैप और चुनौतियां
भारत की योजना 2030 तक 100 मीट्रिक टन कोयले का गैसीकरण करने की है, और देश के पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रचुर भंडार हैं। लेकिन इसे सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियों से निपटना होगा, जैसे खराब गुणवत्ता के कोयले, और प्रभावी कार्बन कैप्चर, यूटिलाइज़ेशन और स्टोरेज तकनीक की कमी आदि।
झुलसाती गर्मी: क्या हीटवेव का असर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर नहीं पड़ रहा?
भारत में रिकॉर्ड तापमान के पूर्वानुमानों के बीच लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग ने ‘टास्क फोर्स’ का गठन किया है और जानकार कहने लगे हैं कि क्लाइमेट प्रभावों को देखते हुए चुनाव की टाइमिंग में बदलाव किया जा सकता है।